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Bihar Panchayat Election 2026: समय पर होंगे पंचायत चुनाव या टलेंगे? तैयारियों में देरी से बढ़ी चिंता

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Alam Ki Khabar | बिहार पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियां धीमी पड़ गई हैं। मतदाता सूची, आरक्षण प्रक्रिया और मतदान केंद्र निर्धारण का काम अब तक शुरू नहीं होने से समय पर चुनाव होने पर सवाल उठने लगे हैं।

पटना/आलम की खबर:बिहार में वर्ष 2026 के अंत तक प्रस्तावित पंचायत आम चुनाव को लेकर अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। चुनावी प्रक्रिया की रफ्तार बेहद धीमी होने के कारण अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या राज्य में पंचायत चुनाव तय समय पर कराए जा सकेंगे या फिर इन्हें आगे बढ़ाना पड़ेगा। अभी तक न तो नई मतदाता सूची तैयार की गई है, न मतदान केंद्रों के निर्धारण की प्रक्रिया आगे बढ़ी है और न ही तीसरे चरण के पदवार आरक्षण का काम शुरू हो पाया है। ऐसे में चुनावी कैलेंडर पर समय का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

सबसे बड़ी चुनौती राज्य निर्वाचन आयोग के नेतृत्व में संभावित बदलाव को भी माना जा रहा है। वर्तमान राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. दीपक प्रसाद का कार्यकाल 27 जुलाई 2026 को समाप्त हो रहा है। यदि समय पर नए आयुक्त की नियुक्ति नहीं होती है तो लंबित चुनावी प्रक्रियाओं में और विलंब हो सकता है। वहीं, नए आयुक्त के पदभार संभालने के बाद भी पूरी व्यवस्था को गति देने में कुछ समय लगना स्वाभाविक माना जा रहा है।

अब तक चुनावी तैयारियों के नाम पर केवल वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायत पदों की आबादी का निर्धारण और उसका प्रकाशन किया गया है। इसके अलावा मतदाता सूची का पुनरीक्षण, मतदान केंद्रों का निर्धारण, चुनाव कर्मियों की तैयारी और आरक्षण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं अभी शुरुआती चरण तक भी नहीं पहुंची हैं। यही कारण है कि समय पर चुनाव कराने को लेकर संशय गहराता जा रहा है।

बिहार पंचायती राज अधिनियम, 2006 के अनुसार पंचायत चुनाव से पहले प्रत्येक पद के लिए आरक्षण का निर्धारण राज्य निर्वाचन आयोग की निगरानी में जिला स्तर पर किया जाना अनिवार्य है। पहली बार यह व्यवस्था 2006 में लागू हुई थी, जबकि दूसरी बार वर्ष 2016 में दो चुनावों के बाद आरक्षण का पुनर्निर्धारण किया गया था। अब तीसरे चक्र के तहत दोबारा सभी पंचायत पदों का आरक्षण तय किया जाना है।

जानकारी के अनुसार राज्यभर में करीब ढाई लाख पंचायत पदों के लिए आरक्षण तय किया जाना है। इनमें मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के पद शामिल हैं। लेकिन अब तक इस दिशा में कोई आधिकारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से भी कोई निश्चित समय-सीमा घोषित नहीं की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार आरक्षण प्रक्रिया पहले से अधिक संवेदनशील होगी। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार अति पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा। वर्ष 2022 के नगर निकाय चुनाव में भी इसी प्रकार की कानूनी जटिलताओं के कारण चुनाव निर्धारित समय से लगभग दो महीने बाद कराए गए थे। ऐसे में पंचायत चुनाव के लिए भी सभी कानूनी औपचारिकताओं को समय रहते पूरा करना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

इस बीच राज्य निर्वाचन आयोग के सामने नए नगर निकायों में चुनाव कराने की जिम्मेदारी भी है। यदि नगर निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारियां एक साथ चलती हैं तो प्रशासनिक मशीनरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इससे पंचायत चुनाव की समय-सीमा और प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

बिहार देश की सबसे बड़ी पंचायती राज व्यवस्थाओं में शामिल है। राज्य में 8,053 मुखिया, 8,053 सरपंच, 1,09,635 वार्ड सदस्य, 1,09,635 पंच, 11,085 पंचायत समिति सदस्य तथा 1,160 जिला परिषद सदस्यों के पदों पर चुनाव होना है। इतने बड़े चुनाव के लिए मतदाता सूची, मतदान केंद्र, सुरक्षा व्यवस्था और आरक्षण प्रक्रिया का समय पर पूरा होना बेहद जरूरी माना जाता है।

फिलहाल चुनाव आयोग या राज्य सरकार की ओर से चुनाव टालने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि मौजूदा तैयारियों की गति को देखते हुए राजनीतिक दलों और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि लंबित प्रक्रियाओं में जल्द तेजी नहीं लाई गई तो दिसंबर 2026 तक पंचायत चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अब सभी की नजर राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है।

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क्या समय पर हो पाएंगे पंचायत चुनाव?

पंचायत चुनाव केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं बल्कि गांवों की विकास व्यवस्था की रीढ़ हैं। यदि चुनाव समय पर नहीं होते हैं तो स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तय समय के भीतर पूरा करने की होगी। आने वाले कुछ सप्ताह यह तय करेंगे कि बिहार में पंचायत चुनाव समय पर होंगे या उनकी तारीख आगे बढ़ेगी।

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